देश के पहले राष्ट्रीय बैट सर्वे में 135 में से 7 प्रजातियाँ खतरे में, 35 का डेटा नहीं
अप्रैल 2026 के मध्य में जारी भारत के पहले राष्ट्रीय-स्तरीय बैट संरक्षण सर्वे ने पाया है कि देश की 135 ज्ञात बैट प्रजातियों में से 7 IUCN Red List पर खतरे में सूचीबद्ध हैं, जबकि अन्य 35 प्रजातियों का डेटा अपर्याप्त है और 16 भारत में स्थानीय (एंडेमिक) हैं। Nature Conservation Foundation के साथ तैयार State of India's Bats रिपोर्ट शहरीकरण, अक्षय-ऊर्जा अवसंरचना और महामारी-बाद कलंक को सबसे बड़े खतरे बताती है, और Wildlife Institute of India की अगुवाई में व्यवस्थित निगरानी की माँग करती है।
क्या हुआ: भारत का पहला व्यापक State of India's Bats सर्वे, Nature Conservation Foundation और वैश्विक साझेदारों के साथ तैयार, अप्रैल 2026 के मध्य में जारी हुआ। यह बैट प्रजातियों, वितरण, खतरों और शोध-अंतरालों की भारत की पहली राष्ट्रीय-स्तरीय समीक्षा है।
मायने रखने वाले आँकड़े: भारत में 135 ज्ञात बैट प्रजातियाँ हैं। इनमें से 7 IUCN Red List पर खतरे में सूचीबद्ध हैं, 16 भारत में स्थानीय (एंडेमिक) हैं, और चौंकाने वाली बात — 35 प्रजातियाँ Data Deficient हैं, यानी इतना भी डेटा नहीं कि तय हो सके वे घट रही हैं या नहीं। उदाहरण के लिए Khasian Leaf-nosed बैट स्पष्ट दबाव में है पर अब तक IUCN द्वारा औपचारिक रूप से मूल्यांकित नहीं किया गया।
बैट कहाँ रहते हैं: राज्य-स्तर पर पश्चिम बंगाल 68 प्रजातियों के साथ सबसे आगे है, उसके बाद मेघालय, उत्तराखंड, केरल, कर्नाटक और सिक्किम। यह पैटर्न भारत के दो बड़े जैव-विविधता हॉटस्पॉट — पश्चिमी घाट और Indo-Burma क्षेत्र — का अनुसरण करता है।
बैट दबाव में क्यों हैं: रिपोर्ट तीन कारकों को रेखांकित करती है। पहला, शहरीकरण ने रूस्टिंग-वृक्ष, गुफाएँ और पुरानी इमारतें ख़त्म की हैं जिनका बैट उपयोग करते हैं। दूसरा, पवन-फार्म और सौर-फार्म अवसंरचना के तेज़ विस्तार से सीधी मृत्यु और आवास विखंडन हो रहा है। तीसरा, महामारी-बाद कलंक — झूठा विचार कि सभी बैट ख़तरनाक रोग-भंडार हैं — ने उनकी छवि बिगाड़ी है, ठीक उस समय जब अन्य बड़े स्तनधारियों पर नीतिगत ध्यान बढ़ा है।
भारत के लिए: बैट मापने योग्य पारिस्थितिकी सेवाएँ देते हैं। फलाहारी प्रजातियाँ महुआ, केले और कई वन-वृक्षों का परागण और बीज-प्रसार करती हैं। कीटाहारी प्रजातियाँ धान के planthopper और कपास के bollworm जैसे फसल-कीटों को नियंत्रित कर पेस्टिसाइड की ज़रूरत घटाती हैं। बैट गुआनो वन-मिट्टी को समृद्ध करता है। रिपोर्ट नागरिक-विज्ञान नेटवर्क, राष्ट्रीय रूस्ट इन्वेंटरी और अक्षय परियोजनाओं की पर्यावरण-प्रभाव मूल्यांकन (EIA) में बैट को शामिल करने की माँग करती है — MoEFCC और Wildlife Institute of India के लिए सीधी नीतिगत माँग।
परीक्षा दृष्टिकोण: शीर्ष आँकड़े याद रखें — 135 प्रजातियाँ, 7 खतरे में, 35 Data Deficient, 16 एंडेमिक — सबसे अधिक विविधता वाला राज्य (पश्चिम बंगाल, 68 प्रजातियाँ), और तीन मुख्य खतरे। स्थैतिक संदर्भ: Wildlife Protection Act, 1972 की अनुसूचियाँ और Convention on Biological Diversity के तहत भारत की प्रतिबद्धताएँ।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- भारत में 135 ज्ञात बैट प्रजातियाँ हैं।
- 7 प्रजातियाँ IUCN Red List पर खतरे में; 35 Data Deficient।
- 16 प्रजातियाँ भारत में स्थानीय (एंडेमिक)।
- सबसे अधिक बैट विविधता पश्चिम बंगाल में (68 प्रजातियाँ), उसके बाद मेघालय, उत्तराखंड, केरल, कर्नाटक, सिक्किम।
- खतरे: शहरीकरण, पवन / सौर फार्म अवसंरचना, COVID-बाद रोग-वाहक होने का कलंक।
- बैट परागण, बीज-प्रसार, कीट-नियंत्रण और मिट्टी-पोषक सेवाएँ देते हैं।
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC प्रीलिम्स और मेन्स GS-III के पर्यावरण व जैव-विविधता के लिए उपयोगी। सीधे तथ्य: IUCN श्रेणियाँ, एंडेमिक प्रजातियों की संख्या, और बैट की पारिस्थितिकी सेवाएँ।
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