भारत नए उर्वरकों के लिए तेज़ मंज़ूरी क्यों चाहता है
सरकार नए उर्वरकों की मंज़ूरी की प्रक्रिया तेज़ करने की योजना बना रही है, जिसमें भारत में अभी 800 से अधिक दिन लगते हैं जबकि अमेरिका में 90 दिन। गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाले उत्पादों को अनिवार्य क्षेत्र परीक्षणों से छूट देकर, सरकार रिकॉर्ड सब्सिडी बिल के बीच किसानों को कुशल, विशेष फसल पोषक तत्वों तक तेज़ पहुँच देना चाहती है।
केंद्र सरकार भारत में कुछ नए उर्वरकों की मंज़ूरी को अधिक तेज़ और आसान बनाने की योजना बना रही है। वर्तमान में, जब तक किसी नए उर्वरक का Fertiliser (Control) Order, 1985 के तहत पंजीकरण नहीं हो जाता, तब तक उसे देश में नहीं बेचा जा सकता; यह नियमन फसल पोषक तत्वों के निर्माण, आयात और बिक्री को नियंत्रित करता है। कंपनी को उत्पाद की रासायनिक संरचना, उसके बनने की विधि और उसकी सुरक्षा पर एक विस्तृत दस्तावेज़ देना होता है, उसके बाद कम-से-कम दो फसल मौसमों तक कई स्थानों पर क्षेत्र परीक्षण करने होते हैं ताकि यह साबित हो सके कि वह सचमुच उपज बढ़ाता है। फिर एक केंद्रीय समिति आँकड़ों की समीक्षा करके उत्पाद को मंज़ूरी देती या अस्वीकार करती है।
समस्या रफ़्तार की है। अधिकारियों और उद्योग का कहना है कि भारत में नया उर्वरक पंजीकृत कराने में 800 से अधिक दिन लगते हैं, जबकि अमेरिका में लगभग 90, यूरोपीय संघ और जापान में लगभग 30, और वियतनाम में सिर्फ़ 15 दिन। सरकार अब उन उर्वरकों को अनिवार्य क्षेत्र परीक्षणों से छूट देने पर विचार कर रही है जो पहले से तय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा करते हैं। एक सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है, और कृषि अनुसंधान निकाय, उद्योग तथा राज्य सरकारों के साथ विचार-विमर्श के बाद इस सुधार को अंतिम रूप दिया जाएगा। इससे नए उत्पाद किसानों तक कहीं तेज़ी से पहुँचने की उम्मीद है।
इस कदम के पीछे एक मज़बूत वित्तीय पृष्ठभूमि है। वर्ष 2026-27 के लिए सरकार का उर्वरक सब्सिडी बिल लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने वाला है, जो बजटीय आँकड़े से कहीं अधिक और पुराने सभी रिकॉर्डों के पार है। सब्सिडी का मतलब है सरकारी धन, जो किसानों के लिए उर्वरक की कीमतें कम रखता है। यूरिया जैसे भारी सब्सिडी वाले उत्पादों का व्यापक उपयोग होता है, पर ये अकुशल हैं: यूरिया की केवल लगभग 30 से 40 प्रतिशत नाइट्रोजन ही फसल वास्तव में इस्तेमाल करती है, बाकी हवा में उड़ जाती है या भूजल में बह जाती है। सरकार गैर-सब्सिडी वाले, विशेष उत्पादों, जैसे जल-घुलनशील और धीमे-रिलीज़ उर्वरकों को बढ़ावा देना चाहती है, जो पोषक तत्वों को कहीं अधिक कुशलता से पहुँचाते हैं और ड्रिप सिंचाई के ज़रिए सटीक रूप से डाले जा सकते हैं।
किसानों के लिए तेज़ मंज़ूरी का मतलब होगा विशिष्ट फसलों और वृद्धि के चरणों के अनुरूप बने उन्नत उत्पादों तक जल्दी पहुँच, जिससे उन्हें हर इकाई पोषक तत्व से अधिक उपज पाने में मदद मिलेगी। यह तब और भी मूल्यवान है जब आयातित उर्वरकों और कच्चे माल की लागत बढ़ चुकी है। सुरक्षा उपाय बने रहेंगे: कंपनियों को अब भी न्यूनतम पोषक-तत्व स्तर पूरा करना होगा, भारी धातुओं जैसे हानिकारक प्रदूषकों की सीमा के भीतर रहना होगा, और उत्पादों पर सही लेबलिंग करनी होगी, जबकि जाँच उत्पाद के बाज़ार में पहुँचने से पहले के बजाय उसके बाद की जाएगी।
परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह कहानी कृषि नीति, उर्वरक सब्सिडी के बोझ, पोषक-तत्व उपयोग दक्षता, और नियमन तथा व्यापार-सुगमता के बीच संतुलन की व्यापक थीम को जोड़ती है, जो अर्थव्यवस्था, कृषि और समसामयिकी खंडों में उपयोगी है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- भारत में Fertiliser (Control) Order, 1985 के तहत पंजीकरण के बिना कोई नया उर्वरक नहीं बेचा जा सकता।
- भारत में पंजीकरण में 800 से अधिक दिन लगते हैं, जबकि अमेरिका में लगभग 90, EU और जापान में लगभग 30, और वियतनाम में सिर्फ़ 15 दिन।
- सरकार तय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाले उर्वरकों को अनिवार्य दो-मौसम क्षेत्र परीक्षणों से छूट देने की योजना बना रही है।
- वर्ष 2026-27 का उर्वरक सब्सिडी बिल लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने वाला है, जो एक रिकॉर्ड उच्च स्तर है।
- यूरिया अकुशल है (इसकी सिर्फ़ 30-40 प्रतिशत नाइट्रोजन ही फसल इस्तेमाल करती है), इसलिए ध्यान अब कुशल जल-घुलनशील और धीमे-रिलीज़ उत्पादों की ओर बढ़ रहा है।
- सुरक्षा उपाय बने रहेंगे: न्यूनतम पोषक-तत्व मात्रा, प्रदूषकों पर सीमा, सटीक लेबलिंग और बाज़ार में आने के बाद जाँच।
परीक्षा प्रासंगिकता
कृषि नीति, उर्वरक सब्सिडी के बोझ और व्यापार-सुगमता सुधार को जोड़ता है, जो अर्थव्यवस्था और कृषि की एक आम समसामयिकी थीम है।
संबंधित लेख
आरबीआई ने 7 जुलाई 2026 को ₹50,000 करोड़ का 1-दिवसीय वीआरआर नीलामी …
आरबीआई ने 7 जुलाई 2026 को ₹50,000 करोड़ की ओवरनाइट वेरिएबल रेट रेपो नीलामी आयोजित …
आरबीआई ने 6 जुलाई 2026 को 3-दिवसीय चर दर रेपो नीलामी आयोजित …
आरबीआई ने 6 जुलाई 2026 को 3-दिवसीय वीआरआर नीलामी में ₹14,600 करोड़ को 5.26% की …
महाराष्ट्र में FDA ने सिंथेटिक दूध की जालबाजी को तोड़ा, पांच जिलों …
FDA ने 4-5 जुलाई, 2026 को महाराष्ट्र में सिंथेटिक दूध की जालबाजी को तोड़ा, 13 …
एल नीनो और बढ़ते आयात: 2026 में भारत की खाद्य सुरक्षा को …
एल नीनो के मजबूत चरण से भारत की खरीफ और रबी फसलों को खतरा है, …
दिल्ली की ईवी नीति 2030 तक 30% इलेक्ट्रिकरण का लक्ष्य रखती है, …
दिल्ली वायु प्रदूषण में कमी के लक्ष्य के तहत 2030 तक अपने 30% वाहनों को …