सौर तूफान और ध्रुवीय ज्योति (Aurora): क्यों Northern Lights भारत के आकाश में दिखे
8 June 2026 के शक्तिशाली सौर तूफान ने Ladakh और ऊपरी हिमालय जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में Aurora दिखाई दिया। यह explainer Sunspots, Solar Flares, CME और Space Weather के पृथ्वी पर प्रभाव को समझाता है।
8 June 2026 को आए एक शक्तिशाली सौर तूफान ने Aurora — जिसे लोकप्रिय रूप से 'northern lights' कहा जाता है — को भारत के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिखाई देने योग्य बना दिया। इसमें Kashmir के कुछ हिस्से, Uttarakhand के ऊपरी हिमालयी क्षेत्र, और Ladakh के Pangong Tso तथा Hanle क्षेत्र शामिल थे। Aurora आमतौर पर केवल ध्रुवों के निकटवर्ती क्षेत्रों में दिखता है, इसलिए भारत में इसका दिखना दुर्लभ है और यह असामान्य रूप से तीव्र सौर गतिविधि से जुड़ा है।
Aurora सूर्य की गतिविधि से उत्पन्न होता है। सूर्य एक चुंबकीय चक्र से गुजरता है जिसमें उसकी सतह पर गहरे धब्बे बनते हैं जिन्हें Sunspots कहते हैं। इन क्षेत्रों से ऊर्जा के तीव्र विस्फोट को Solar Flares कहते हैं और ये अंतरिक्ष में आवेशित कणों के विशाल बादलों को भेज सकते हैं — इस घटना को Coronal Mass Ejection (CME) कहते हैं।
जब ये आवेशित कण पृथ्वी तक पहुंचते हैं, तो अधिकांश ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetosphere) द्वारा विक्षेपित हो जाते हैं, लेकिन कुछ चुंबकीय ध्रुवों की ओर मार्गदर्शित हो जाते हैं। वहां वे ऊपरी वायुमंडल में Oxygen और Nitrogen से टकराते हैं और ऊर्जा को चमकदार प्रकाश के पर्दों के रूप में मुक्त करते हैं — जिसे हम Aurora के रूप में देखते हैं। एक शक्तिशाली, पृथ्वी की ओर निर्देशित CME इस चमक को सामान्य से कम अक्षांशों तक धकेल सकता है।
ये Space Weather की घटनाएं केवल सुंदर नहीं होतीं: तेज सौर तूफान उपग्रहों, GPS संकेतों, रेडियो संचार और बिजली ग्रिड को बाधित कर सकते हैं। परीक्षा के दृष्टिकोण से मुख्य शब्द हैं: Sunspots, सौर चक्र, Solar Flares, Coronal Mass Ejections, पृथ्वी का Magnetosphere, और 'Space Weather' की अवधारणा।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- 8 June 2026 के सौर तूफान ने ऊंचाई वाले भारत (Ladakh, ऊपरी हिमालय) में Aurora दिखाई दिया
- Aurora सूर्य से आवेशित कणों के ऊपरी वायुमंडल से टकराने से बनता है
- Sunspots सूर्य पर चुंबकीय रूप से सक्रिय गहरे धब्बे होते हैं
- Solar Flares और Coronal Mass Ejections (CME) आवेशित कणों को बाहर फेंकते हैं
- पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र कणों को ध्रुवों की ओर मोड़ता है
- तेज सौर तूफान उपग्रह, GPS, रेडियो और बिजली ग्रिड को बाधित कर सकते हैं
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC Prelims (विज्ञान और प्रौद्योगिकी — अंतरिक्ष, सौर घटनाएं), और SSC/State PCS परीक्षाओं में सामान्य विज्ञान के लिए प्रासंगिक।
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