RBI ने Upper-Layer NBFC नियम बदला: अब एकमात्र Rs 1 लाख करोड़ की संपत्ति सीमा
RBI ने Upper-Layer NBFC की कसौटी सरल कर दी है: अब Rs 1 लाख करोड़ या उससे अधिक की संपत्ति वाली कोई भी NBFC इसमें आएगी, जो Scale-Based Regulation के तहत पहले की बहु-कारक स्कोरिंग पद्धति की जगह लेगी।
Reserve Bank of India (RBI) ने Upper-Layer Non-Banking Financial Company (NBFC-UL) की पहचान करने का तरीका बदल दिया है। नए नियम के तहत, Rs 1 लाख करोड़ या उससे अधिक की संपत्ति वाली किसी भी NBFC को Upper-Layer NBFC माना जाएगा। यह पहले की उस जटिल स्कोरिंग पद्धति की जगह लेगा, जो आकार, आपसी जुड़ाव और अन्य कारकों पर आधारित थी।
RBI के Scale-Based Regulation ढांचे के तहत, NBFCs को चार परतों — Base, Middle, Upper और Top — में रखा जाता है, जहाँ ऊपर की परतों के लिए नियम लगातार सख्त होते जाते हैं। Upper Layer में आने वाली कंपनी को सख्त governance, अधिक पूँजी और disclosure मानकों का पालन करना पड़ता है, और उसे अधिसूचित होने के तीन साल के भीतर किसी stock exchange पर list होना अनिवार्य है।
यह बदलाव बड़ी holding कंपनियों के लिए सबसे अधिक मायने रखता है। 2024 में RBI ने एक बड़े औद्योगिक समूह की holding कंपनी को Upper-Layer NBFC के रूप में वर्गीकृत किया था, जिससे वह एक अनिवार्य public listing की राह पर आ गई थी। अब नए एकल-सीमा नियम के साथ, ऐसी कंपनी Upper Layer में बनी रहेगी या नहीं, यह पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि उसकी पात्र NBFC संपत्ति Rs 1 लाख करोड़ से ऊपर है या नहीं — अगर वह इस स्तर से नीचे आ गई है, तो listing की शर्त शायद लागू न हो।
उम्मीदवारों के लिए मुख्य बात यह है कि RBI, Scale-Based Regulation का उपयोग करके निगरानी की सख्ती को NBFC के आकार और प्रणालीगत महत्व के अनुसार तय करता है, जिससे वित्तीय स्थिरता की रक्षा होती है और छोटे खिलाड़ियों पर अनुपालन का बोझ कम होता है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- नया नियम: Rs 1 लाख करोड़ या उससे अधिक संपत्ति वाली NBFC = Upper-Layer NBFC (NBFC-UL)
- पहले की बहु-मानक स्कोरिंग पद्धति की जगह लेगा
- NBFC-UL को 3 साल के भीतर stock exchange पर list होना और सख्त मानकों का पालन करना होगा
- RBI के Scale-Based Regulation का हिस्सा (Base, Middle, Upper, Top परतें)
- उद्देश्य: निगरानी को आकार और प्रणालीगत महत्व के अनुरूप करना, छोटी NBFCs पर बोझ घटाना
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC Prelims और Banking परीक्षाओं (Economy — NBFCs का RBI नियमन, Scale-Based Regulation) तथा SSC General Awareness के लिए प्रासंगिक।
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