West Asia के तेल संकट के बावजूद भारत 8% से ऊपर बढ़ेगा: PM-EAC सदस्य
प्रधानमंत्री की Economic Advisory Council के एक सदस्य ने 8 June 2026 को कहा कि West Asia के तनाव और महंगे crude के बावजूद भारत 8% से ऊपर बढ़ सकता है, क्योंकि refining से होने वाला फायदा और मजबूत घरेलू मांग तेल के झटकों को संभाल लेते हैं।
प्रधानमंत्री की Economic Advisory Council (EAC) के एक सदस्य ने 8 June 2026 को कहा कि crude oil की बढ़ती कीमतों से भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान होने का डर असल आंकड़ों से कम और धारणा (perception) से ज्यादा जुड़ा है। इस अधिकारी को, जिन्हें World Bank में भारत का Executive Director भी नियुक्त किया गया है, का कहना था कि West Asia में तनाव जारी रहने के बावजूद भारत बाकी ज्यादातर तेल आयात करने वाले देशों की तुलना में महंगे crude को बेहतर तरीके से झेल सकता है, और इससे विकास दर में तेज गिरावट नहीं आएगी।
उन्होंने बताया कि FY25 (वित्त वर्ष April 2024 से March 2025) में अर्थव्यवस्था 7.1% की दर से बढ़ी, जबकि उस समय monetary policy और fiscal policy दोनों सख्त थीं। "Monetary tightening" का मतलब है ऊंची ब्याज दरें जो बैंक उधारी को धीमा कर देती हैं, और "fiscal tightening" का मतलब है सरकार का सोच-समझकर खर्च करना ताकि fiscal deficit (सरकार की कमाई और खर्च के बीच का अंतर) कम हो सके। उनके अनुसार, ऐसी सख्त स्थितियों में 7.1% की वृद्धि अर्थव्यवस्था की भीतरी मजबूती को साबित करती है, और अब जब credit फिर से बढ़ रहा है, तो February-March 2026 तक सालाना रफ्तार 8% पार कर रही थी।
इस राय के समर्थन में उन्होंने मांग के कई जमीनी संकेत गिनाए: May 2026 में car sales का साल-दर-साल करीब 29% बढ़ना, shopping malls में भारी भीड़ और खर्च, और cement की मांग का high single-digit दर से बढ़ना। उन्होंने जोर देकर कहा कि cement एक भरोसेमंद संकेतक है क्योंकि इसे लंबे समय तक स्टॉक के रूप में जमा नहीं रखा जा सकता, इसलिए जो भी खरीदा जाता है वह वास्तव में निर्माण में इस्तेमाल हो रहा होता है। उनका कहना था कि इतनी मजबूत मांग अर्थव्यवस्था को लेकर फैली निराशाजनक बातों से मेल नहीं खाती।
तेल के बारे में उन्होंने समझाया कि भारत कीमतों के झटकों से उतना प्रभावित नहीं है जितना लोग मानते हैं, क्योंकि भारतीय तेल कंपनियां refineries भी चलाती हैं और जब refining margins (crude को diesel जैसे ईंधन में बदलने से होने वाला मुनाफा) बढ़ते हैं तो उनकी कमाई बढ़ जाती है। उन्होंने एक उदाहरण दिया: अगर crude USD 70 से बढ़कर USD 100 प्रति barrel हो जाए और diesel का crack spread बढ़े, तो कई देशों के लिए landed cost USD 150 तक पहुंच सकती है, लेकिन भारत के लिए refining से होने वाले फायदे के चलते यह USD 120 के करीब ही रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि United States और China द्वारा भंडार जारी करने के बाद crude घटकर करीब USD 94-95 प्रति barrel पर आ गया था, इसलिए ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी की जरूरत नहीं थी और करीब Rs 8 प्रति लीटर का मौजूदा बफर पर्याप्त था। उन्हें उम्मीद है कि अगर crude ऊंचा भी बना रहे, तो भी मजबूत घरेलू मांग और refining hub के रूप में भारत की भूमिका के चलते करीब 7.5-8% की वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि असली चुनौती तब तक जनता की धारणा को बदलना है जब तक आंकड़े साफ तौर पर मजबूती न दिखा दें।
परीक्षा की तैयारी के लिहाज से यह खबर Economic Advisory Council (एक संस्था जो आर्थिक मामलों पर प्रधानमंत्री को सलाह देती है) को उन मुख्य अवधारणाओं से जोड़ती है जो अक्सर UPSC, banking और state PCS परीक्षाओं में पूछी जाती हैं: GDP growth, fiscal बनाम monetary tightening, fiscal deficit, crude oil आयात पर निर्भरता, refining margins और crack spreads, तथा भारत और World Bank के बीच संबंध। FY25 की वृद्धि दर (7.1%), 8% से ऊपर की अनुमानित रफ्तार, और cement व car sales को मांग के संकेतक के रूप में क्यों इस्तेमाल किया जाता है, यह जरूर याद रखें।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- एक PM-EAC सदस्य, जिन्हें World Bank में भारत का Executive Director भी नियुक्त किया गया है, ने 8 June 2026 को यह आकलन दिया
- सख्त monetary और fiscal policy के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था FY25 में 7.1% बढ़ी; सालाना रफ्तार Feb-March 2026 तक 8% पार करती दिखी
- मांग के संकेतक गिनाए गए: May 2026 में car sales साल-दर-साल करीब 29% बढ़ी, malls में जोरदार बिक्री, cement की मांग में high single-digit वृद्धि
- भारतीय तेल कंपनियां refineries चलाती हैं, इसलिए ऊंचे refining margins (crack spreads) महंगे crude की भरपाई कर देते हैं; landed cost भारत के लिए USD 120 के करीब रहती है जबकि अन्यत्र USD 150
- US और China द्वारा भंडार जारी करने के बाद crude घटकर करीब USD 94-95 प्रति barrel पर आया; ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी की जरूरत नहीं, करीब Rs 8/लीटर का बफर पर्याप्त माना गया
- ऊंचे crude के बावजूद भी करीब 7.5-8% वृद्धि की उम्मीद; मुख्य अड़चन जनता की धारणा है, न कि बुनियादी मजबूती
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC, banking और state PCS परीक्षाओं के लिए उपयोगी, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के विषयों जैसे GDP growth, fiscal और monetary policy, fiscal deficit, crude oil आयात निर्भरता, refining margins, और Economic Advisory Council की भूमिका को कवर करती हैं।
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