केंद्र ने सब्सिडी में उछाल के बावजूद FY26 का 4.4% राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पूरा किया
केंद्र ने FY26 का GDP के 4.4% का राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पूरा किया, भले ही उर्वरक सब्सिडी बिल करीब Rs 2.1 लाख करोड़ तक पहुँच गया। लक्ष्य मुख्यतः मंत्रालयों के खर्च में कटौती और धीमे capital expenditure के जरिये बचाया गया।
केंद्र सरकार ने 2025–26 के लिए GDP के 4.4% के राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) के लक्ष्य को पूरा किया और महामारी के बाद उधारी कम करने की योजना पर अमल जारी रखा। राजकोषीय घाटा सरकार के कुल खर्च और उसकी कुल आय (उधारी को छोड़कर) के बीच का अंतर होता है, और इसे कम करना राजकोषीय अनुशासन का एक प्रमुख मापदंड है।
लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं था। पश्चिम एशिया के संघर्ष ने वैश्विक उर्वरक कीमतों को ऊपर धकेल दिया और उर्वरक सब्सिडी बिल तेजी से बढ़कर करीब Rs 2.1 लाख करोड़ हो गया — जो हाल के वर्षों में सबसे अधिक है — क्योंकि सरकार ने किसानों को कीमतों के झटके से बचाया। इससे करीब Rs 37,700 करोड़ यानी GDP के करीब 0.1% का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
इसे संभालते हुए भी लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार ने खर्च में कटौती का सहारा लिया। कई मंत्रालयों के आवंटन में कमी की गई और पूंजीगत व्यय (capital expenditure) — यानी सड़क, रेलवे और बंदरगाहों जैसी दीर्घकालिक संपत्तियों पर खर्च — पिछले वर्षों की तुलना में बहुत धीरे बढ़ा और संशोधित अनुमान से भी कम रहा।
परीक्षार्थियों के लिए यह प्रकरण सार्वजनिक वित्त के केंद्रीय द्वंद्व को उजागर करता है: एक सरकार घाटे के लक्ष्य की रक्षा या तो राजस्व बढ़ाकर या खर्च घटाकर कर सकती है। लक्ष्य पूरा करने के लिए capital expenditure में कटौती करने से अल्पकालिक राजकोषीय विश्वसनीयता बनी रह सकती है, लेकिन दीर्घकालिक विकास को नुकसान पहुँच सकता है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- FY26 राजकोषीय घाटे का लक्ष्य GDP के 4.4% पर पूरा किया
- उर्वरक सब्सिडी बिल करीब Rs 2.1 लाख करोड़ तक बढ़ा (हाल के वर्षों में सर्वाधिक)
- अतिरिक्त सब्सिडी बोझ करीब Rs 37,700 करोड़ (GDP का 0.1%)
- मंत्रालय-वार खर्च में कटौती से लक्ष्य की रक्षा की गई
- Capital expenditure धीरे बढ़ा और संशोधित अनुमान से भी कम रहा
- महामारी के बाद के राजकोषीय समेकन (fiscal consolidation) पथ को दर्शाता है
परीक्षा प्रासंगिकता
UPSC Prelims और Mains (अर्थव्यवस्था — सरकारी बजट, राजकोषीय घाटा, FRBM), Banking परीक्षाएं, तथा SSC सामान्य जागरूकता के लिए प्रासंगिक।
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