Environment 08 Jun 2026

ग्रेट निकोबार परियोजना: रणनीति और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन

लगभग Rs 91,000 करोड़ की ग्रेट निकोबार परियोजना इस सवाल पर जांच के घेरे में है कि क्या इसका रणनीतिक तर्क पारिस्थितिक रूप से समृद्ध वर्षावन को साफ करने को उचित ठहराता है। समीक्षाओं ने इसके रणनीतिक उद्देश्यों पर सवाल उठाए और Viability Gap Funding देने से मना कर दिया।

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ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना, जिसकी अनुमानित लागत अब लगभग Rs 91,000 करोड़ हो गई है, अपने दावा किए गए रणनीतिक महत्व और पर्यावरणीय नुकसान के बीच संतुलन को लेकर एक बार फिर विवाद में है। इस परियोजना में Galathea Bay पर एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक बिजली संयंत्र और एक टाउनशिप शामिल है।

सरकार लंबे समय से इस परियोजना को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताती रही है और इसी आधार पर पर्यावरण संबंधी मंजूरियों का विवरण सार्वजनिक करने से बचती रही है। हालांकि, वित्त मंत्रालय की एक संस्था, Public Investment Board, ने 2024 में कथित रूप से पाया कि पोर्ट में 'रणनीतिक उद्देश्यों का अभाव' था, और यह रणनीतिक तर्क बाद में जोड़ा गया था। एक मूल्यांकन समिति ने भी Viability Gap Funding देने से मना कर दिया और बंदरगाह मंत्रालय से इसे अपने बजट से वित्त पोषित करने को कहा — यह रुख किसी राष्ट्रीय रूप से महत्वपूर्ण परियोजना के लिए असामान्य माना जाता है।

Great Nicobar, Andaman और Nicobar द्वीपसमूह के दक्षिणी छोर पर स्थित है और उष्णकटिबंधीय वर्षावनों तथा पारिस्थितिक दृष्टि से दुर्लभ मूंगे की चट्टानों से ढका है। परियोजना के कारण बड़े पैमाने पर प्राथमिक वन कट सकते हैं और Shompen व Nicobarese जैसे आदिवासी समुदायों के आवासों सहित नाजुक पारिस्थितिक तंत्र बाधित हो सकते हैं।

परीक्षा की तैयारी के लिए यह विकास बनाम पर्यावरण, National Green Tribunal और पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया, Particularly Vulnerable Tribal Groups (PVTGs) की सुरक्षा, तथा Indo-Pacific में Andaman और Nicobar द्वीपों के रणनीतिक महत्व को जोड़ने वाला एक मजबूत केस स्टडी है।

याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

  • ग्रेट निकोबार परियोजना की अनुमानित लागत लगभग Rs 91,000 करोड़
  • इसमें ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, हवाई अड्डा, बिजली संयंत्र और टाउनशिप शामिल हैं
  • वित्त मंत्रालय की एक संस्था ने 2024 में पाया कि पोर्ट में 'रणनीतिक उद्देश्यों का अभाव' था
  • मूल्यांकन समिति ने Viability Gap Funding देने से मना किया
  • परियोजना से प्राथमिक वर्षावन और दुर्लभ प्रवाल भित्तियां नष्ट होने तथा आदिवासी आवास बाधित होने का खतरा
  • PVTGs (Shompen, Nicobarese) की सुरक्षा और पर्यावरण मंजूरी से जुड़े सवाल उठते हैं

परीक्षा प्रासंगिकता

UPSC Prelims और Mains (पर्यावरण — संरक्षण, पर्यावरण मंजूरी; भूगोल; जनजातीय मुद्दे — PVTGs) और सामान्य अध्ययन के लिए प्रासंगिक।

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