DRDO अध्यक्ष DefSpace 2026 में: अंतरिक्ष ही भविष्य के युद्धों का फैसला करेगा
23-04-2026 को 4th Indian DefSpace Symposium में बोलते हुए DRDO अध्यक्ष Dr. Samir V. Kamat ने कहा कि अंतरिक्ष ऐसा प्रमुख डोमेन बन गया है जो भविष्य के संघर्षों का परिणाम तय करेगा, और भारत की क्षमता-कमी पाटने के लिए "whole-of-nation" दृष्टिकोण ज़रूरी है।
23-04-2026 को Manekshaw Centre में आयोजित 4th Indian DefSpace Symposium में Defence Research and Development Organisation (DRDO) के अध्यक्ष Dr. Samir V. Kamat ने एक तीखी चेतावनी दी: अंतरिक्ष भविष्य के युद्धों का परिणाम तय करेगा, और प्रतिद्वंद्वी अंतरिक्ष कार्यक्रमों की गति के साथ क़दम मिलाने के लिए भारत को "whole-of-nation" प्रयास की आवश्यकता है।
Dr. Kamat ने कहा कि जहाँ Indian Space Research Organisation (ISRO) भारत के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रमुख एजेंसी बनी हुई है, वहीं अंतरिक्ष का सैन्य पक्ष 2019 में Defence Space Agency के गठन के बाद से DRDO को सौंपा गया है। तीन क्षेत्रों को प्राथमिकता बताया गया। पहला, space situational awareness — कक्षा में उपग्रहों और मलबे को ट्रैक करने की क्षमता — ताकि भारतीय अंतरिक्ष-आधारित संपत्तियाँ सुरक्षित रहें। दूसरा, NavIC, भारत की क्षेत्रीय navigation प्रणाली, की restricted service का सैन्य उपयोग के लिए विकास, जहाँ नागरिक GPS पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। तीसरा, अंतरिक्ष-आधारित निगरानी, संचार और synthetic-aperture imaging radar में क्षमताएँ।
संसाधनों पर DRDO अध्यक्ष ने कहा कि रक्षा मंत्री ने अगले 5 वर्षों में रक्षा research-and-development खर्च को कुल रक्षा बजट के लगभग 10 प्रतिशत तक दोगुना करने की प्रतिबद्धता दी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि DRDO startups, MSMEs व academia के साथ अधिकाधिक काम करेगा, और अंतरिक्ष को एक मुख्य फ़ोकस बनाते हुए अपने Centres of Excellence नेटवर्क का विस्तार कर रहा है।
बड़े symposium में sovereign अंतरिक्ष क्षमता पर भी चर्चा हुई — स्वदेशी launch vehicles, on-orbit servicing, और अंतरिक्ष-संपत्तियों पर electronic व cyber हमलों के विरुद्ध लचीलापन। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था IN-SPACe नियामक और निजी launch व small-satellite कंपनियों की एक नई पीढ़ी के माध्यम से बढ़ाई जा रही है।
परीक्षा कोण: Defence Space Agency, ISRO बनाम DRDO अधिकार-क्षेत्र, NavIC, IN-SPACe, space situational awareness, रक्षा R&D बजट हिस्सा, और भारत का अंतरिक्ष नीति ढाँचा UPSC GS-III (विज्ञान-तकनीक व सुरक्षा), CDS, AFCAT, NDA व CAPF के लिए नियमित विषय हैं।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- DRDO अध्यक्ष Dr. Samir V. Kamat ने 23-04-2026 को Manekshaw Centre में 4th Indian DefSpace Symposium को संबोधित किया।
- कहा कि अंतरिक्ष ऐसा प्रमुख डोमेन बन गया है जो भविष्य के युद्धों का फैसला करेगा; "whole-of-nation" दृष्टिकोण ज़रूरी।
- 2019 में Defence Space Agency के गठन के बाद से DRDO अंतरिक्ष के सैन्य पक्ष की अगुवाई करता है; ISRO नागरिक कार्यक्रम की लीड एजेंसी।
- तीन प्राथमिकताएँ: space situational awareness, सैन्य उपयोग के लिए restricted NavIC service, और अंतरिक्ष-आधारित निगरानी / imaging radar।
- अगले 5 वर्षों में रक्षा R&D बजट कुल रक्षा खर्च के लगभग 10 प्रतिशत तक दोगुना होगा।
- startups, MSMEs, academia और अंतरिक्ष Centres of Excellence के साथ अधिक सहयोग।
परीक्षा प्रासंगिकता
Defence Space Agency, DRDO-ISRO अधिकार-क्षेत्र, NavIC, IN-SPACe, space situational awareness, रक्षा R&D, सैन्य अंतरिक्ष कार्यक्रम। UPSC GS-III (S&T व सुरक्षा), CDS, AFCAT, NDA, CAPF, SSC GA के लिए उपयोगी।
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